परमार्थ निकेतन गंगा तट पर अभिनेत्री भूमि पेडनेकर का भावपूर्ण आध्यात्मिक अनुभव

*परमार्थ निकेतन गंगा तट पर अभिनेत्री भूमि पेडनेकर का भावपूर्ण आध्यात्मिक अनुभव*

*पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में गंगा जी में लगायी डुबकी*

*भूमि पेडनेकर को भाया परमार्थ निकेतन गंगा तट, बोलीं “यह रिश्ता अब अटूट, अखंड और सदा के लिए”*              मां गंगा संग अनुभूति बनी अविस्मरणीय*

ऋषिकेश, 17 मार्च। आज प्रसिद्ध अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने पुनः परमार्थ निकेतन में आगमन कर आध्यात्मिक शांति और दिव्यता का अनुभव किया।

पावन गंगा तट पर, पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी के सान्निध्य में भूमि पेडनेकर ने गंगा स्नान कर आत्मिक शुद्धि और आंतरिक शांति की अनुभूति के एक अद्भुत क्षणों का आनंद लिया। गंगा की निर्मल धाराओं में डुबकी लगाकर संतोष और सुकून का पाया।

भूमि पेडनेकर जी ने गंगा तट की दिव्यता और शांति को अनुभव करते हुए कहा कि “यहाँ आकर ऐसा लगता है मानो समय थम गया हो और मन को एक नई ऊर्जा मिल रही हो।” उन्होंने साझा किया कि परमार्थ निकेतन का वातावरण, गंगा की कलकल ध्वनि और पूज्य स्वामीजी व साध्वी जी का पावन सान्निध्य मन को गहराई से स्पर्श करता है।

इस पुनः आगमन के दौरान भूमि पेडनेकर ने परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से भी दिव्य भेंट वार्ता की। इस दौरान स्वामी जी ने उन्हें जीवन में संतुलन, आंतरिक शांति और सेवा के महत्व पर प्रेरणादायक मार्गदर्शन प्रदान किया। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि “जब हम बाहरी सफलता के साथ आंतरिक शांति को जोड़ते हैं, तभी जीवन पूर्णता की ओर अग्रसर होता है।”

इसके पश्चात भूमि जी ने पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी के साथ भी आत्मीय संवाद किया। साध्वी जी ने उन्हें भारतीय संस्कृति, मां गंगा जी के साथ उनके अपने संबंध का उल्लेख करते हुये सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

गंगा तट पर बिताए गए सुकून भरे पलों ने भूमि पेडनेकर के मन को गहराई से छू लिया। उन्होंने कहा कि “इस पावन स्थान पर आकर एक अलग ही ऊर्जा का अनुभव हो रहा है। मैंने अनुभव किया कि मैं स्वर्ग जैसे पवित्र तीर्थ में हूँ। मैं अपने भावों को शब्दों के माध्यम से प्रकट नहीं कर पा रही हूँ। आज मुझे लग रहा है कि मुझे यहाँ वर्षों पहले आ जाना चाहिए था। कुछ तो है जो मुझे यहाँ खींचकर लाया है। आज पुनः माँ गंगा ने मुझे परमार्थ निकेतन आने हेतु प्रेरित किया। अब यह रिश्ता मानो सदा-सदा के लिए अटूट, अखंड व अटल हो गया है।” यहाँ की शांति, सकारात्मकता और आध्यात्मिकता जीवन की भागदौड़ में खोए हुए संतुलन को वापस लाने में सहायक है।”

उन्होंने कहा कि परमार्थ निकेतन में बिताए गए ये सुकून भरे पल उनके जीवन की अमूल्य स्मृतियों में सदैव अंकित रहेंगे और यह अनुभव उन्हें भविष्य में भी आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता रहेगा।

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