योग और प्रकृति संरक्षण का अद्भुत संगम: बड़े हनुमान मंदिर में संपन्न हुआ ‘हरित योग कार्यक्रम’

योग और प्रकृति संरक्षण का अद्भुत संगम: बड़े हनुमान मंदिर में संपन्न हुआ ‘हरित योग कार्यक्रम’
हरिद्वार। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस-2026 की जन-जागरूकता श्रृंखला के अंतर्गत बड़े हनुमान मंदिर, बैरागी कैंप, हरिद्वार में ‘हरित योग कार्यक्रम’ का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य योग के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण एवं प्रकृति के प्रति जनसामान्य को जागरूक करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में योग साधकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं स्थानीय नागरिकों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. स्वास्तिक सुरेश ने की तथा सह-अध्यक्षता आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. अश्वनी कौशिक द्वारा की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आयुष मिशन विशेषज्ञ डॉ. अवनीश कुमार उपाध्याय उपस्थित रहे। वहीं अति विशिष्ट अतिथि के रूप में डोभालवाला, देहरादून के उप प्रधानाचार्य दुष्यंत कुमार तथा राष्ट्रीय आयुष मिशन के नोडल अधिकारी डॉ. विक्रम सिंह रावत ने सहभागिता कर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।

कार्यक्रम का शुभारंभ सामूहिक योगाभ्यास से हुआ, जिसमें प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान का अभ्यास कराया गया। योगाभ्यास के माध्यम से स्वास्थ्य संवर्धन, मानसिक शांति एवं पर्यावरणीय संतुलन के महत्व पर विशेष बल दिया गया। उपस्थित अतिथियों ने योग को जीवन का अभिन्न अंग बनाने तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए जनभागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. स्वास्तिक सुरेश ने कहा कि योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का अमूल्य उपहार है, जो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य संवर्धन दोनों ही वैश्विक आवश्यकता बन चुके हैं। ऐसे में “हरित योग” की अवधारणा स्वस्थ समाज एवं स्वच्छ पर्यावरण के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है।

मुख्य अतिथि डॉ. अवनीश कुमार उपाध्याय ने अपने संबोधन में कहा कि योग और प्रकृति दोनों ही मानव जीवन के आधार हैं। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति योग के माध्यम से स्वयं को प्रकृति से जोड़ता है, तब उसके जीवन में संतुलन, स्वास्थ्य एवं सकारात्मकता का विकास होता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से योग को जीवन का अभिन्न अंग बनाने तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान करते हुए “एक व्यक्ति–एक पौधा” का संकल्प लेने का संदेश दिया।

अति विशिष्ट अतिथि दुष्यंत कुमार ने कहा कि योग केवल शारीरिक क्रिया नहीं बल्कि जीवन जीने की कला है। उन्होंने विद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों में योग एवं पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देने पर बल देते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि योग अनुशासन, आत्मविश्वास एवं सकारात्मक सोच का विकास करता है और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कार्यक्रम की लिंक अधिकारी डॉ. रीना भटकोटी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अंतर्गत जनपद में विभिन्न योग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य जनसामान्य को योग के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि “हरित योग कार्यक्रम” योग एवं पर्यावरण संरक्षण को एक सूत्र में जोड़ने का प्रभावी प्रयास है, जो समाज को स्वस्थ एवं पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम के सफल आयोजन एवं संचालन में विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रभारी अधिकारी डॉ. विजेंद्र कुशवाहा ने संपूर्ण कार्यक्रम की योजना, समन्वय एवं व्यवस्थाओं का प्रभावी संचालन किया, जबकि डॉ. रीना भटकोटी ने कार्यक्रम के आयोजन, अतिथि समन्वय एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं का कुशल निर्वहन किया। योग सत्र के संचालन एवं प्रतिभागियों को योगाभ्यास कराने में अदिति, दीपक एवं निकुंज का विशेष योगदान रहा। इनकी देखरेख में प्रतिभागियों ने विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास किया।

कार्यक्रम की व्यवस्थाओं, सामग्री प्रबंधन, प्रतिभागी समन्वय एवं अन्य आवश्यक कार्यों में मुकेश गोड़ियाल, ललित मोहन, सुशील रावत एवं अजहर अली ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। इसके अतिरिक्त डॉ. विकास दुबे, प्रतिभा, महिमा, विनय, अमित, विजय एवं टेकचंद ने कार्यक्रम के विभिन्न व्यवस्थात्मक एवं संचालन संबंधी कार्यों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर आयोजन को सफल बनाया। सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों से कार्यक्रम सुव्यवस्थित, प्रभावी एवं प्रेरणादायी रूप में संपन्न हुआ, जिसकी उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों द्वारा सराहना की गई।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने “योग करें – प्रकृति बचाएं”, “एक व्यक्ति – एक पौधा” तथा “स्वस्थ शरीर, स्वच्छ पर्यावरण, समृद्ध जीवन” का संकल्प लिया। उपस्थित अतिथियों ने इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए इसे योग एवं पर्यावरण संरक्षण के समन्वित अभियान की दिशा में एक प्रेरणादायक प्रयास बताया।

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