ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का ज़ोर

*ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का ज़ोर*

*हरिद्वार ।  नोडल अधिकारी स्वच्छता चन्द्रकातं मणि त्रिपाठी ने अवगत कराया है कि उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, रुड़की ने जिलाधिकारी, मयूर दीक्षित के निर्देशों व सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में “ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026” के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु विभागवार निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।

सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का अनुपालन मा० उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली में योजित सिविल अपील के अनुपालन में आदेश जारी किया गया है। इन आदेशों के तहत ठोस अपशिष्टों के उचित प्रबंधन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा निरीक्षण और जागरूकता के प्रयास

उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय, रुड़की ने जिलाधिकारी के पत्र दिनांक 26 मई 2026 के अनुपालन में 19 सॉलिड वेस्ट डंप साइट्स का निरीक्षण किया है। इस निरीक्षण का विस्तृत विवरण जियो-टैग फोटोग्राफ्स सहित संलग्न किया गया है।

इसके अतिरिक्त, क्षेत्रीय कार्यालय ने ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन नियम 2026 के अनुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दो महत्वपूर्ण पोस्टर तैयार किए हैं। एक पोस्टर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के बारे में जानकारी देता है, जबकि दूसरा प्रतिबंधित एकल-उपयोग प्लास्टिक (Banned Single Use Plastic Items) वस्तुओं के संबंध में जागरूकता फैलाता है। इन पोस्टरों का उपयोग जन-जागरूकता अभियान के लिए किया जाएगा और इनकी प्रतियां सभी स्थानीय निकायों को भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

बोर्ड ने इस पत्र के माध्यम से विभिन्न स्थानीय निकायों और संबंधित अधिकारियों को ठोस अपशिष्ट डंप साइटों के निस्तारण हेतु नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। जिन निकायों को प्रतिलिपि भेजी गई है, उनमें नगर निगम रुड़की, नगर निगम हरिद्वार, नगर पालिका परिषद मंगलौर, और विभिन्न नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारी शामिल हैं। जिला पंचायती राज अधिकारी को भी निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के लिए निर्देशित करें।

यह पहल उत्तराखण्ड में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को बेहतर बनाने और प्लास्टिक के उपयोग को नियंत्रित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने और जन-जागरूकता फैलाने के लिए बोर्ड द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। इन उपायों से न केवल पर्यावरण की सुरक्षा होगी, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य में भी सुधार की उम्मीद है।

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