हरिद्वार में पट्टाभिषेक कार्यक्रम सम्पन्न

डॉ स्वामी संतोष मुनि महाराज की महंत पद पर तिलक चादर विधि संपन्न हरिद्वार भूपतवाला 27जून 2026 श्री गुरु सर्वानन्द सुतीक्षण मुनि आश्रम मुखिया गली हरिद्वार में डॉ स्वामी संतोष मुनि उदासीन जी महाराज का पट्टाभिषेक कार्यक्रम सम्पन्न हुआ । संतों ने दी आध्यात्मिक परंपरा को नई ऊर्जाहरिद्वार भूपतवाला स्थित गुरु सर्वानन्द सुतीक्षण मुनि आश्रम, मुखिया गली में षड्दर्शन साधु समाज के पधारे संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति में आश्रम के महंत पद पर पूज्य डॉ स्वामी संतोष मुनि उदासीन जी महाराज का तिलक-चदर देकर महन्त पद पर पट्टाभिषेक समारोह हर्षोल्लास, वैदिक मंत्रोच्चार और संत परंपरा के अनुरूप अत्यंत भव्य और दिव्य ढंग से सम्पन्न हुआ।

ज्ञातव्य है कि ब्रह्मलीन् श्री स्वामी सुतीक्ष्ण मुनि जी महाराज के द्वारा देश के कई राज्यों में आश्रम एवं गौशालाएँ तथा विभिन्न भागों में अनेक धार्मिक एवं जन सेवा संस्थानों की स्थापनाएँ की गई हैं। वर्ष 2005 में उनके ब्रह्मलीन होने के पश्चात उनके परम सेवाभावी शिष्य स्वामी शंकर मुनि महाराज प महंत पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। उनके वर्ष 2022 में ब्रह्मलीन होने के बाद उदासीन भेष भगवान व षड्दर्शन साधु समाज के गणमान्य सन्त महन्त महामण्डलेश्वर महापुरुषों ने सर्वसम्मत निर्णय से डॉ स्वामी संतोष मुनि उदासीन जी महाराज को आश्रम का नया महंत नियुक्त किया गया। इस अवसर पर संतों ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी सुतीक्ष्ण मुनि जी महाराज ज्ञान, सेवा और तपस्या के ऐसे प्रकाशपुंज थे, जिनकी आध्यात्मिक विरासत आज भी समाज का मार्गदर्शन कर रही है।महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद महाराज ने कहा—”महंत पद केवल सम्मान नहीं, बल्कि सेवा, त्याग और धर्म संरक्षण का महान दायित्व है। डं स्वामी संतोष मुनि जी इस परंपरा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएँगे।”

महामंडलेश्वर स्वामी सुरेश मुनि महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा—”गुरु परंपरा की ज्योति कभी नहीं बुझती, वह योग्य शिष्य के माध्यम से निरंतर प्रकाशित होती रहती है। यह पट्टाभिषेक उसी दिव्य परंपरा का उत्सव है।”महामंडलेश्वर स्वामी विवेकानंद महाराज ने कहा—”धर्म की वास्तविक शक्ति प्रेम, करुणा और लोककल्याण में निहित है। डॉ स्वामी संतोष मुनि जी इन आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य करेंगे।”महंत स्वामी दयानंद महाराज ने कहा—”जहाँ गुरु की कृपा और संतों का आशीर्वाद होता है, वहाँ सेवा और साधना का प्रवाह कभी रुकता नहीं। यह आश्रम सदैव धर्म एवं मानवता की सेवा करता रहेगा।”

प्रातःस्मरणीय परम पूज्य महंत रघुबीर दास महाराज ने अपने संदेश में कहा—”गुरु का उत्तराधिकारी वही है, जो विनम्रता, तप और समर्पण के साथ गुरु की शिक्षाओं को जीवन में उतारे। स्वामी संतोष मुनि जी इस कसौटी पर पूर्णतः खरे उतरते हैं।”

महंत कमलेशानंद सरस्वती महाराज ने कहा—”संत समाज की एकता ही सनातन संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति है। यह पट्टाभिषेक समारोह उसी आध्यात्मिक एकता और गौरव का प्रेरक उदाहरण है।”समारोह के अंत में सभी संत-महात्माओं ने नवमहंत स्वामी संतोष मुनि उदासीन जी महाराज को शुभाशीष प्रदान करते हुए आशा व्यक्त की कि उनके नेतृत्व में आश्रम धर्म, संस्कृति, गौसेवा एवं मानव सेवा के क्षेत्र में निरंतर नई उपलब्धियाँ प्राप्त करेगा। श्रद्धालुओं ने भी बड़ी संख्या में उपस्थित होकर इस ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक आयोजन के साक्षी बन पुण्य लाभ प्राप्त किया। इस अवसर पर महंत सूरज दास महाराज महंत रघुवीर दास महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी विवेकानंद महाराज, महामण्डलेश्वर श्री स्वामी शिवानन्द जी महाराज, महामण्डलेश्वर श्री स्वामी रूपेन्द्र स्वरूप जी महाराज, स्वामी कमल मुनि महाराज, स्वामी बलराम मुनि, महंत मोहन सिंह महाराज महंत राघवेंद्र दास महाराज सहित भारी संख्या में संत महापुरुष उपस्थित थे

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