परमार्थ निकेतन मां गंगा के पावन तट पर मासिक श्रीराम कथा का आयोजन

परमार्थ निकेतन मां गंगा के पावन तट पर मासिक श्रीराम कथा का आयोजन*

*🌸15 मई से 17 जून, 2026, प्रातः 09 बजे से दोपहर 01ः30 बजे तक*

*💐पर्यावरण, भारतीय संस्कृति, संस्कार, गौ सेवा, सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करने और को समर्पित मासिक श्रीराम कथा*

*🌸पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य, आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन में कथा व्यास मानस मर्मज्ञ संत मुरलीधर जी के पावन श्रीमुख से मां गंगा के पावन तट पर प्रवाहित मानस ज्ञान गंगा*

*🌺शौर्य, पराक्रम एवं बलिदान के मूर्तिमान प्रतीक, स्वराज्य के रक्षक, धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज को जयंती के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन से विनम्र अभिवादन!*

*🌸एक पेड़ मां के नाम – एक पेड़ धरती मां के नाम को समर्पित*

ऋषिकेश, 15 मई। परमार्थ निकेतन के पावन परिसर में मां गंगा के दिव्य तट पर प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी 15 मई से 17 जून 2026 तक प्रतिदिन प्रातः 09 बजे से दोपहर 01ः30 बजे तक मासिक श्रीराम कथा का भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन किया जा रहा है। पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में यह कथा आध्यात्मिक चेतना के प्रवाह के साथ भारतीय संस्कृति, संस्कार, पर्यावरण संरक्षण, गौ सेवा तथा सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त भारत के संकल्प को समर्पित एक जनजागरण अभियान है।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य, आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन में कथा व्यास, मानस मर्मज्ञ संत संत मुरलीधर जी के श्रीमुख से प्रवाहित होने वाली मानस ज्ञान गंगा श्रद्धालुओं को अध्यात्म, सेवा, संस्कार और राष्ट्र चेतना से जोड़ने का दिव्य माध्यम है। कथा स्थल पर श्रद्धालु श्रीरामचरितमानस गुटका हाथों में लेकर कथा व्यास जी के साथ श्रद्धा एवं भक्ति भाव से चैपाइयों का सामूहिक गायन करते हुए दिव्य प्रसंगों का आनंदपूर्वक श्रवण कर आध्यात्मिक ऊर्जा एवं आत्मिक शांति का अनुभव करते हैं।

इस अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन एक धार्मिक आख्यान नहीं, बल्कि आदर्श जीवन, मर्यादा, कर्तव्य, सेवा और प्रकृति संरक्षण का अनुपम संदेश है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता केवल कथा सुनने की नहीं, बल्कि कथा को जीवन में उतारने की है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में श्रीराम जी के आदर्शों को अपनाये तो समाज में सद्भाव, करुणा, नैतिकता और पर्यावरण संरक्षण की भावना स्वतः जागृत होगी।

उन्होंने कहा कि “एक पेड़ मां के नाम – एक पेड़ धरती मां के नाम” अभियान आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संकल्प है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी मां एवं धरती मां के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए। वर्तमान समय में बढ़ती भीषण गर्मी और जलवायु परिवर्तन मानवता के लिये गंभीर चेतावनी है। वृक्ष केवल पर्यावरण संतुलन का आधार नहीं, बल्कि जीवन, प्राणवायु, शीतलता और संस्कृति के संवाहक हैं। धरती को सुरक्षित एवं आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ भविष्य देने हेतु अधिकाधिक वृक्षारोपण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

पूज्य स्वामी जी ने सिंगल यूज प्लास्टिक के बढ़ते दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्लास्टिक केवल नदियों और पर्यावरण को प्रदूषित नहीं करता, बल्कि मानव जीवन और जैव विविधता के लिये भी गंभीर खतरा बन चुका है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने, कपड़े एवं जूट के थैलों का उपयोग करने तथा स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को जनआन्दोलन बनाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गौ माता करुणा, पोषण और प्रकृति के संतुलन का प्रतीक है। गौ संरक्षण और गौ सेवा भारतीय संस्कृति एवं सनातन मूल्यों की रक्षा का महत्वपूर्ण आधार है।

कथा व्यास, मानस मर्मज्ञ संत संत मुरलीधर जी ने कहा कि मुझे वर्षभर भारत के विभिन्न राज्यों एवं क्षेत्रों में श्रीराम कथा गायन का सौभाग्य प्राप्त होता है, किन्तु मां गंगा के पावन तट, परमार्थ निकेतन का दिव्य, आध्यात्मिक एवं पर्यावरण चेतना से ओतप्रोत वातावरण वास्तव में अद्भुत और अलौकिक है। पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य, आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन में कथा गायन करना आत्मिक आनंद, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण अनुभव है। यहां मां गंगा की निर्मलता, संतों का सान्निध्य, पर्यावरण संरक्षण का संदेश और श्रद्धालुओं की भक्ति कथा को और अधिक जीवंत, प्रेरणादायी एवं भावपूर्ण बना देती है।

इस अवसर पर धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि छत्रपति संभाजी महाराज शौर्य, पराक्रम, राष्ट्रभक्ति और धर्म रक्षा के अद्वितीय प्रतीक थे। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा हेतु सदैव प्रेरित करता रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *